अध्याय 1: चाँदनी में आग
रात के ग्यारह बजे थे। चाँदनी रात में मधु की छत पर हल्की ठंडी हवा चल रही थी। मधु, एक 32 साल की शादीशुदा औरत, अपनी साड़ी के पल्लू को कंधे पर लपेटे हुए छत पर टहल रही थी। उसकी आँखों में नींद की हल्की खुमारी थी, क्योंकि उसने कुछ देर पहले नींद की गोली खाई थी। लेकिन उसका दिल बेचैन था। पति शहर से बाहर थे, और घर की तन्हाई उसे खाए जा रही थी।
अचानक, पड़ोस की छत से एक हल्की सी आवाज आई। मधु ने चौंककर देखा। वहाँ सनी खड़ा था, 20 साल का कॉलेज स्टूडेंट, जिसकी मुस्कान में एक अजीब सा जादू था। उसकी टी-शर्ट पसीने से भीगी हुई थी, और उसकी मांसपेशियाँ चाँदनी में चमक रही थीं।
'क्या बात है, भाभी? इतनी रात को छत पर अकेले?' सनी ने अपनी गहरी आवाज में पूछा, एक कुटिल मुस्कान के साथ।
मधु ने भौंहें चढ़ाईं, 'तुझे क्या? मैं अपनी छत पर हूँ, तेरे बाप की नहीं। और तू यहाँ क्या कर रहा है, लड़के?'
सनी हँसा, 'अरे, भाभी, गुस्सा मत करो। मैं तो बस जिम से आया हूँ, थोड़ी हवा खाने निकला। लेकिन तुम्हें देखा तो लगा, चाँद आज छत पर उतर आया है।'
मधु के गाल लाल हो गए, लेकिन उसने खुद को संभाला। 'बकवास बंद कर, सनी। मैं तेरे फ्लर्ट से नहीं पिघलने वाली।'
सनी ने एक कदम आगे बढ़ाया, अपनी छत से कूदकर मधु की छत पर आ गया। 'पिघलना तो दूर, भाभी, तुम तो आग हो। मैं तो बस पास आकर देखना चाहता हूँ कि ये आग कितनी गर्म है।'
मधु का दिल जोर से धड़का। उसकी नींद की गोली का असर अब हल्का हो रहा था, लेकिन उसकी साँसें तेज हो गई थीं। 'सनी, हद में रह। मैं शादीशुदा हूँ।'
'शादीशुदा हो, लेकिन खुश तो नहीं,' सनी ने कहा, उसकी आँखों में एक भूख थी। वह और पास आया, इतना कि मधु उसकी गर्म साँसें महसूस कर सकती थी। 'मैं देख सकता हूँ, भाभी। तुम्हारी आँखों में वो तड़प है, जो मैं मिटा सकता हूँ।'
मधु ने उसे धक्का देने की कोशिश की, लेकिन उसकी ताकत के सामने वो कमजोर पड़ गई। 'सनी, ये गलत है,' उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज में एक हल्की सी कँपकँपी थी।
'गलत? गलत तो वो है जो तुम्हें अकेला छोड़ गया, भाभी। मैं तो बस सही करना चाहता हूँ,' सनी ने कहा और उसने मधु की कमर पकड़ ली। उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया, और चाँदनी में उसकी गहरी नाभि चमक उठी।
मधु की साँसें तेज हो गईं। उसका शरीर गर्म होने लगा था। 'सनी, ये... ये पागलपन है,' उसने कहा, लेकिन उसकी आँखें कुछ और कह रही थीं।
सनी ने उसकी ठोड़ी पकड़कर उसका चेहरा ऊपर किया। 'पागलपन ही तो जिंदगी है, भाभी। आज रात, बस हम हैं, ये चाँदनी है, और हमारी ये आग।'
उसने मधु को अपनी बाहों में खींच लिया, और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मधु ने एक पल के लिए विरोध किया, लेकिन फिर वो भी बह गई। उसकी उंगलियाँ सनी के बालों में उलझ गईं, और वो उसे और पास खींचने लगी। सनी की जीभ उसके मुँह में घुस गई, और वो दोनों एक-दूसरे को चूमते हुए पागल हो गए।
सनी ने मधु की साड़ी को खींचना शुरू किया, और उसकी गर्म त्वचा को छूते हुए उसकी पीठ पर हाथ फेरा। मधु की साँसें पैंटिंग की तरह तेज हो गई थीं। 'सनी... रुक जा,' उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज में अब कोई ताकत नहीं थी।
'रुकना अब नामुमकिन है, भाभी,' सनी ने कहा, उसकी आँखों में एक जंगली भूख थी। उसने मधु को छत की दीवार के सहारे धकेल दिया, और उसकी साड़ी को पूरी तरह से उतार फेंका। चाँदनी में मधु का नंगा बदन चमक रहा था, और सनी का शरीर अब पूरी तरह से hard हो चुका था।
(अगले अध्याय में जारी...)
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