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Jethalal Ki Jeet: Ek Raat Ki Hawas

Jethalal Ki Jeet: Ek Raat Ki Hawas

अध्याय 1: दांव पर बीवियां

जेठालाल की हंसी गोकुलधाम सोसाइटी के क्लब हाउस में गूंज रही थी। ज़ुआ का खेल चल रहा था, और उसके दोस्त—अय्यर, सोढ़ी, भिड़े, पोपटलाल और हाठीसिंह—सब अपनी जेबें खाली कर चुके थे। मगर खेल का नशा अभी भी सिर चढ़कर बोल रहा था। जेठालाल ने अपनी मूंछों पर ताव देते हुए कहा, 'क्या यार, पैसे खत्म हो गए तो क्या हुआ? कुछ बड़ा दांव लगाओ ना!'

अय्यर ने हंसते हुए कहा, 'अब क्या दांव लगाएं, जेठालाल? घर बेच दें?'

जेठालाल ने आंख मारते हुए जवाब दिया, 'घर नहीं, भाई। अपनी बीवियों को दांव पर लगाओ। हार गए तो एक रात के लिए मेरी हो जाएंगी। जीत गए तो मैं अपनी दया को तुम्हारे हवाले कर दूंगा। बोलो, हिम्मत है?'

सबके चेहरे पर हंसी थी, मगर लालच और नशे ने उनकी अक्ल पर पर्दा डाल दिया। एक-एक करके सबने हामी भर दी। भिड़े ने कहा, 'ठीक है, जेठालाल। मगर देख लेना, मधवी को तू छू भी नहीं पाएगा।'

'हा हा, भिड़े मास्टर, तेरी मधवी तो आज रात मेरे बिस्तर पर नाचेगी,' जेठालाल ने ताने मारते हुए कहा।

खेल शुरू हुआ, और किस्मत ने जेठालाल का साथ दिया। एक-एक करके सब हार गए। अब रात गहरा रही थी, और जेठालाल की आंखों में हवस की चमक साफ दिख रही थी। उसने सबको ताने मारते हुए कहा, 'चलो, अब अपनी-अपनी बीवियों को बुलाओ। आज रात मैं इन सबको दिखाऊंगा कि असली मर्द कौन है। तुम जैसे नाकारा मर्दों की औकात क्या है!'

सबकी बीवियां—मधवी, बबीता, अंजलि, बावरी, रोशन और दया—जेठालाल के घर पहुंचीं। उनके चेहरों पर गुस्सा था, मगर कहीं न कहीं एक अजीब सी उत्सुकता भी। जेठालाल ने दरवाजा बंद किया और मुस्कुराते हुए कहा, 'आज रात तुम सब मेरी हो। तुम्हारे पतियों ने तुम्हें हार दिया है, तो अब मैं तुम्हें जीत का स्वाद चखाऊंगा।'

मधवी ने तीखे लहजे में कहा, 'जेठालाल, ये सब बकवास बंद करो। हम कोई सामान नहीं हैं जो दांव पर लगाए जाएं।'

'हा हा, मधवी, अब बहुत देर हो चुकी है। तेरे भिड़े ने तुझे मेरे हवाले कर दिया। अब चुपचाप मेरे पास आ जा,' जेठालाल ने कहा और उसकी तरफ बढ़ा।

बबीता ने बीच में आकर कहा, 'जेठालाल, अगर तू इतना ही मर्द है, तो दिखा ना। हम डरने वालों में से नहीं हैं।'

जेठालाल की आंखों में चमक आ गई। उसने कहा, 'बबीता जी, आज रात मैं तुम सबको दिखाऊंगा कि असली मर्दगी क्या होती है।'

उसने एक-एक करके उनकी साड़ियां और ब्लाउज उतारने शुरू किए। मधवी ने विरोध किया, मगर जेठालाल ने उसकी कलाई पकड़ते हुए कहा, 'चुप रह, मधवी। तेरे भिड़े जैसे कायर की बीवी को आज मैं सबक सिखाऊंगा।'

जल्द ही सब नंगी उसके सामने खड़ी थीं। जेठालाल की नजरें उनकी खूबसूरती पर टिकी थीं। उसने कहा, 'वाह, तुम सबके पति कितने बेवकूफ हैं जो तुम जैसी हसीनाओं को हार गए।'

उसने मधवी को अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों पर जोरदार चुंबन लिया। मधवी ने उसे धक्का देने की कोशिश की, मगर जेठालाल ने उसे कसकर पकड़ लिया। उसकी नजरें बबीता, अंजलि, बावरी, रोशन और दया पर गईं, जो गुस्से और उत्सुकता से उसे देख रही थीं।

'आज रात मैं तुम सबको अपनी बनाऊंगा,' जेठालाल ने कहा, और उसने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। उसका कड़क लंड देखकर सबकी सांसें रुक गईं। उसने मधवी को घुटनों पर बिठाया और कहा, 'चल, शुरू कर। दिखा कि तू कितनी अच्छी है।'

मधवी ने गुस्से से उसकी तरफ देखा, मगर फिर उसने जेठालाल के लंड को अपने मुंह में लिया। उसकी गर्मी और गीलापन जेठालाल को पागल कर रहा था। एक-एक करके बाकी सबने भी उसका साथ दिया। जेठालाल की सांसें तेज हो रही थीं, पसीना टपक रहा था, और उसकी हवस बढ़ती जा रही थी।

'अब देखो, मैं तुम सबकी चूत और गांड को कैसे रगड़ता हूं,' उसने कहा, और मधवी को बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी टांगें फैलाईं और उसकी गीली चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा। मधवी की सांसें तेज हो गईं, और वो कराहने लगी।

'जेठालाल, रुक मत,' बबीता ने कहा, उसकी आंखों में हवस साफ दिख रही थी।

'चिंता मत कर, बबीता जी। तुम सबकी बारी आएगी,' जेठालाल ने हंसते हुए कहा, और मधवी के अंदर धक्का मारना शुरू कर दिया। उसकी पैंटिंग और मधवी की कराहें कमरे में गूंज रही थीं। रात अभी शुरू हुई थी, और जेठालाल की हवस का तूफान आने वाला था।

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