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Pyaar Ki Aag: Surbhi Aur Naveen Ki Raat

Pyaar Ki Aag: Surbhi Aur Naveen Ki Raat

अध्याय 1: मुलाकात की गर्मी

सुरभि की आंखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वो किसी शिकार की तलाश में हो। वो एक हाई-प्रोफाइल बार में खड़ी थी, अपनी टाइट ब्लैक ड्रेस में, जो उसकी कर्व्स को पूरी तरह से उभार रही थी। उसकी नजरें बार के कोने में बैठे नवीन पर टिकी थीं। नवीन, एक लंबा-चौड़ा, रफ-टफ दिखने वाला मर्द, अपनी व्हिस्की का ग्लास लिए हुए मुस्कुरा रहा था। उसकी नजरें भी सुरभि को स्कैन कर रही थीं, जैसे वो उसकी हर हरकत को पढ़ रहा हो।

सुरभि ने अपनी हाई हील्स में कदम बढ़ाए और सीधा नवीन के पास जा खड़ी हुई। 'तो, नवीन, सुना है तुम बड़े प्लेयर हो? क्या मुझ जैसी लड़की को हैंडल कर पाओगे?' उसकी आवाज में एक तीखापन था, जैसे वो उसे चुनौती दे रही हो।

नवीन ने हंसते हुए ग्लास नीचे रखा। 'सुरभि, मैंने सुना है तुम भी कम नहीं हो। लेकिन ये खेल मैं जीतने के लिए खेलता हूं। तैयार हो?' उसकी आवाज में एक गहरा आकर्षण था, जो सुरभि को अंदर तक हिला गया।

'खेल? हाह! मैं तो आग हूं, नवीन। जलने के लिए तैयार हो जाओ,' सुरभि ने कहा, और अपनी उंगलियों से नवीन की कॉलर को हल्का सा खींचा। बार की मद्धम रोशनी में उनकी नजरें टकराईं, और हवा में एक अजीब सी गर्मी फैल गई।

नवीन ने उसका हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींच लिया। 'आग तो मैं भी हूं, सुरभि। देखते हैं कौन किसे बुझाता है,' उसने फुसफुसाया, और उसकी सांसें सुरभि की गर्दन पर गर्मी छोड़ रही थीं। सुरभि की सांसें तेज हो गईं, लेकिन वो पीछे नहीं हटी। उसने नवीन की छाती पर हाथ रखा और कहा, 'मेरी गर्मी को बुझाने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए, नवीन।'

उन दोनों ने बार से निकलते हुए एक-दूसरे को छेड़ना जारी रखा। बाहर एक सुनसान गली में, नवीन ने सुरभि को दीवार से लगा दिया। 'अब बोल, सुरभि, कितनी गर्मी है तुझमें?' उसकी आवाज में एक भूख थी।

सुरभि ने हंसते हुए कहा, 'नवीन, मेरी गर्मी को महसूस करना चाहते हो? तो रुक क्यों रहे हो?' उसने अपनी ड्रेस की स्ट्रैप को हल्का सा नीचे खिसकाया, और नवीन की आंखों में एक ज्वाला भड़क उठी। उसने सुरभि को अपनी बाहों में कस लिया, और उनके होंठ एक-दूसरे से टकरा गए। वो चुंबन इतना तीव्र था कि दोनों की सांसें रुक सी गईं।

सुरभि ने नवीन की शर्ट को खींचा और कहा, 'नवीन, मैं इंतजार नहीं कर सकती। मुझे अभी चाहिए।' नवीन ने उसकी कमर को कसकर पकड़ा और फुसफुसाया, 'सुरभि, तूने आग लगाई है, अब मैं इसे बुझाऊंगा।' उसकी उंगलियां सुरभि की ड्रेस के नीचे सरकने लगीं, और सुरभि की सांसें और तेज हो गईं। वो दोनों एक-दूसरे के इतने करीब थे कि उनकी गर्मी एक-दूसरे को पिघला रही थी।

(जारी रहेगा...)

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