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इच्छा की आग

इच्छा की आग

अध्याय 1: पहली मुलाकात की चिंगारी

रात के ग्यारह बजे थे, और दिल्ली की सड़कों पर एक हल्की ठंडी हवा चल रही थी। नेहा, एक तेज-तर्रार फैशन डिजाइनर, अपनी काली स्कॉर्पियो गाड़ी से एक हाई-प्रोफाइल पार्टी से लौट रही थी। उसकी लाल साड़ी उसकी कर्व्स को पूरी तरह से उभार रही थी, और उसकी आंखों में एक आत्मविश्वास भरी चमक थी। वह किसी की गुलाम नहीं थी, न ही किसी के सामने झुकने वाली। लेकिन आज रात, कुछ अलग होने वाला था।

रास्ते में उसकी गाड़ी अचानक रुक गई। इंजन ने जवाब दे दिया था। 'अरे यार, ये तो हद हो गई!' नेहा ने गुस्से में स्टीयरिंग पर हाथ मारा। तभी एक बाइक की तेज आवाज ने उसका ध्यान खींचा। एक लंबा, चौड़े कंधों वाला आदमी, रॉकी, उसकी तरफ आ रहा था। उसकी काली लेदर जैकेट और बिखरे बाल उसे एक खतरनाक आकर्षण दे रहे थे।

'मदद चाहिए, मैडम?' रॉकी ने मुस्कुराते हुए पूछा, उसकी आवाज में एक हल्की मस्ती थी।

'मैं खुद संभाल सकती हूं, लेकिन अगर तुम इतने ही मददगार हो, तो देख लो,' नेहा ने तीखे लहजे में जवाब दिया, उसकी आंखें उसकी मंशा पढ़ने की कोशिश कर रही थीं।

रॉकी ने हंसते हुए कहा, 'अरे, मैं तो बस एक बहाना ढूंढ रहा था तुमसे बात करने का। गाड़ी तो ठीक हो जाएगी, लेकिन तुम्हारी ये तीखी जुबान... उफ्फ, ये तो दिल में चुभ रही है।'

नेहा ने एक भौंह उठाई, 'अच्छा? तो तुम्हें चुभने वाली चीजें पसंद हैं? सावधान, मैं कांटों से भरी हूं।'

'कांटे तोड़ने में मजा है, मैडम। और मैं हार मानने वालों में से नहीं,' रॉकी ने कहा, उसकी आंखों में एक शरारती चमक थी। वह गाड़ी के पास झुका, लेकिन उसकी नजरें नेहा के चेहरे पर टिकी थीं।

नेहा ने हल्का सा मुस्कुराया, 'देखो, मैं कोई आसान शिकार नहीं। अगर तुम खेलना चाहते हो, तो तैयार रहो हारने के लिए।'

'हार? वो शब्द मेरी डिक्शनरी में नहीं है,' रॉकी ने कहा और पास आ गया। उसकी सांसों की गर्मी नेहा को महसूस हो रही थी। हवा में एक अजीब सी तनाव की लहर दौड़ रही थी। नेहा का दिल तेजी से धड़क रहा था, लेकिन वह कमजोर नहीं दिखना चाहती थी।

'तो फिर दिखाओ, तुम में कितना दम है,' नेहा ने चुनौती भरे लहजे में कहा। रॉकी ने एक कदम और बढ़ाया, उसका हाथ नेहा की कमर के पास रुका। नेहा ने उसे रोका नहीं। उसकी सांसें तेज हो गई थीं, और वह महसूस कर रही थी कि उसकी बॉडी में एक गर्मी सी दौड़ रही है।

रॉकी ने धीमे से कहा, 'तुम्हारी आंखों में आग है, नेहा। मैं इसे बुझाने नहीं, बल्कि और भड़काने आया हूं।'

नेहा ने उसकी आंखों में देखा, उसकी आवाज में एक कांपन था, लेकिन वह दृढ़ थी, 'तो फिर रुक क्यों गए? दिखाओ अपनी हिम्मत।'

रॉकी ने उसे अपनी ओर खींच लिया, उसकी मजबूत बाहों में नेहा की सांसें उलझ गईं। उसकी लाल साड़ी का पल्लू हल्का सा सरक गया, और रॉकी की नजरें उसकी नंगी कमर पर टिक गईं। हवा में एक कामुक तनाव था। नेहा की बॉडी में एक अजीब सी गर्मी थी, वह जानती थी कि वह रुक नहीं सकती। वह उसकी आंखों में देख रही थी, और फिर अचानक उसने अपने होंठ उसके करीब ले गए।

(अगले अध्याय में जारी...)

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