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निषिद्ध आकर्षण

निषिद्ध आकर्षण

अध्याय 1: खतरनाक नज़दीकी

घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। दोपहर की गर्मी से बचने के लिए पंखा तेज़ी से घूम रहा था, लेकिन 15 साल के आरव को गर्मी से ज़्यादा कुछ और परेशान कर रहा था। उसकी माँ, नीलम, रसोई में खाना बना रही थी। उनकी साड़ी का पल्लू बार-बार कंधे से सरक रहा था, और उनकी कमर की हल्की-हल्की झलक आरव की नज़रों से नहीं छुप रही थी। नीलम 38 साल की थीं, लेकिन उनकी खूबसूरती और आत्मविश्वास किसी को भी मोहित कर सकता था।

'क्या देख रहा है, आरव? कुछ चाहिए?' नीलम ने मुस्कुराते हुए पूछा, उनकी आवाज़ में एक शरारत थी।

'क...कुछ नहीं, माँ। बस ऐसे ही,' आरव ने हड़बड़ाते हुए कहा, उसकी नज़रें नीचे कर लीं। लेकिन उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था।

नीलम ने हँसते हुए कहा, 'तू बड़ा हो गया है, लेकिन अभी भी शरमाता है। चल, मेरी मदद कर। ये सब्ज़ियाँ काट दे।' वो जानबूझकर उसके पास आईं, उनकी साड़ी का छोर हल्का सा खुल गया, और आरव की साँसें रुक सी गईं।

'माँ, आप... आप बहुत सुंदर हो,' आरव ने हिम्मत जुटाकर कहा, उसकी आवाज़ में काँपन था।

नीलम ने एक भौंह उठाई, उनकी आँखों में चमक थी। 'अच्छा? और तू ये बात अब क्यों बता रहा है? कुछ और भी है जो तू कहना चाहता है?' उनकी आवाज़ में एक चुनौती थी, मानो वो उसे उकसा रही हों।

आरव का चेहरा ल

लाल हो गया। 'मैं... मैं बस... माँ, मैं आपसे प्यार करता हूँ। लेकिन ऐसा प्यार जो... जो शायद गलत है।' उसने अपनी नज़रें उठाईं, और पहली बार उसने देखा कि नीलम की आँखों में भी वही आग थी जो उसके अंदर जल रही थी।

नीलम ने एक कदम और पास आते हुए कहा, 'गलत? कौन तय करता है कि क्या गलत है और क्या सही, आरव? तू मेरे बेटा है, लेकिन तू एक मर्द भी बन रहा है। और मैं... मैं भी एक औरत हूँ।' उनकी साँसें गर्म थीं, और वो अब इतनी पास थीं कि आरव उनकी खुशबू महसूस कर सकता था।

उसके हाथ काँप रहे थे, लेकिन उसने हिम्मत जुटाई और उनकी कमर को छू लिया। नीलम ने कोई विरोध नहीं किया। बल्कि, उन्होंने उसका हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। 'अगर तू ये चाहता है, तो डर मत। लेकिन ये हमारा राज़ रहेगा,' उन्होंने फुसफुसाया।

आरव का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसका शरीर गर्म हो रहा था, और वो महसूस कर सकता था कि उसकी माँ भी उतनी ही उत्तेजित थीं। उनकी साँसें तेज़ थीं, और उनकी आँखों में एक जंगलीपन था। वो उसे रसोई की स्लैब की ओर ले गईं, और उसका हाथ उनकी साड़ी के नीचे सरकने लगा।

'माँ, ये... ये सही है ना?' आरव ने आखिरी बार पूछा, उसकी आवाज़ में हिचकिचाहट थी।

नीलम ने उसकी आँखों में देखा और कहा, 'आज के बाद तू इस सवाल को कभी नहीं पूछेगा। बस महसूस कर।' और फिर, उन्होंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

(जारी रहेगा...)

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