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नदी किनारे की चाहत

नदी किनारे की चाहत

अध्याय 1: पहला स्पर्श

सुबह की हल्की धूप में, रिया अपनी सलवार कमीज में खड़ी थी, उसकी गहरी सांवली त्वचा और ब्रेडेड पोनीटेल उसे और भी आकर्षक बना रही थी। उसका छोटा भाई, अर्जुन, पास खड़ा था, हाथ में एक छोटी सी नथनी लिए। 'दीदी, ये तुम्हारे लिए खास तोहफा है,' उसने मुस्कुराते हुए कहा, उसकी आंखों में एक शरारत थी।

रिया ने हंसते हुए पूछा, 'तोहफा? और क्या चाहिए तुझे? हर बार कुछ नया मांग लेता है!' अर्जुन ने जवाब दिया, 'बस, इसे पहन लो, फिर बताता हूं।' उसने धीरे से नथनी रिया के नाक में पहनाई, और जैसे ही उसने पीछे हटकर उसे देखा, उसकी सांसें रुक गईं। 'दीदी, तुम्हारी ये होंठ... कितने हॉट, सेक्सी, शरारती और लुभावने हैं। ये नथनी तुम्हारी खूबसूरती को और बढ़ा रही है।'

रिया ने शरमाते हुए कहा, 'अर्जुन, ये क्या बोल रहा है? मैं तेरी बड़ी बहन हूं!' लेकिन इससे पहले कि वो कुछ और कह पाती, अर्जुन ने बिना किसी चेतावनी के उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक गहरा, जुनूनी चुम्बन, जिसने रिया को चौंका दिया। उसकी गाल लाल हो गए, शर्म से वो मुस्कुरा रही थी, लेकिन अर्जुन रुका नहीं। उसने अपने हाथों से रिया की कमीज के ऊपर से उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया, उसकी उभरी हुई निप्पल्स को अपनी उंगलियों से छेड़ते हुए।

'अर्जुन, ये क्या कर रहा है? रुक जा!' रिया ने हंसते हुए कहा, लेकिन उसकी आवाज में एक अजीब सी कशिश थी। 'दीदी, मैं तुमसे प्यार करता हूं। तुम्हें देखकर खुद को रोक नहीं पाता,' अर्जुन ने कहा, उसकी आवाज में एक गहरी चाहत थी।

अर्जुन ने रिया को अपनी गोद में उठा लिया और नदी की ओर दौड़ने लगा। रिया ने हैरानी से पूछा, 'कहां ले जा रहा है मुझे?' अर्जुन ने हंसते हुए जवाब दिया, 'तुम इतनी खूबसूरत लग रही हो कि मैं तुम्हें अभी भगा ले जाना चाहता हूं। हमारी शादी के लिए! लेकिन अभी हम नदी किनारे जा रहे हैं, जहां मैं पूरी रात तुम्हारे इन गोल, रसीले स्तनों और सेक्सी निप्पल्स का मजा ले सकूं।'

रिया शरमा रही थी, उसके गाल और लाल हो गए थे। अर्जुन ने उसे नदी किनारे लिटा दिया, और बिना देर किए, उसने रिया की कमीज ऊपर की, उसके हाथों को ऊपर बांध दिया, और उसका चेहरा कमीज से ढक दिया। उसने धीरे से उसकी सलवार और बिकनी उतार दी, अब वो सिर्फ अंडरवियर में थी। रिया की सांसें तेज हो रही थीं, वो शर्म से कांप रही थी, लेकिन अर्जुन की आंखों में सिर्फ जुनून था।

उसने रिया के एक स्तन को अपने मुंह में लिया, उसकी निप्पल को अपनी जीभ से छेड़ते हुए, चूसते हुए। रिया की सिसकारियां निकलने लगीं, उसका शरीर कांप रहा था। 'अर्जुन, ये गलत है... लेकिन रुक मत,' उसने धीमी आवाज में कहा। अर्जुन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, 'दीदी, ये गलत नहीं, ये हमारी चाहत है।' वो बार-बार उसके दोनों स्तनों के बीच बदलता रहा, उसे बार-बार कगार तक ले जाता, लेकिन रिलीज नहीं होने देता। रिया का शरीर एक तने हुए धनुष की तरह था, वो पसीने से तर हो रही थी, उसकी सांसें तेज थीं, वो हॉर्नी हो चुकी थी, उसकी चूत गीली और ड्रिपिंग थी।

नदी किनारे की ठंडी हवा और अर्जुन के गर्म स्पर्श ने माहौल को और भी कामुक बना दिया। रिया की सिसकारियां तेज हो रही थीं, और अर्जुन का लंड अब पूरी तरह से हार्ड था। वो जानता था कि अब वो रुक नहीं सकता, और रिया भी अब पूरी तरह से उसकी थी।

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