अध्याय 1: नजरों की चोरी
घर में सन्नाटा था, सिर्फ बाथरूम से पानी की छप-छप की आवाज आ रही थी। राज, 25 साल का नौजवान, अपने कमरे में बैठा मोबाइल स्क्रॉल कर रहा था, जब अचानक उसकी माँ मीना की आवाज आई, 'राज, जरा तौलिया और एक साड़ी ला दे बेटा, बाथरूम के बाहर रख दे।' मीना, 42 की उम्र में भी कमाल की खूबसूरत थी। उसकी गोरी चमड़ी, भरे हुए जिस्म और गहरी आँखें किसी को भी दीवाना बना सकती थीं। राज ने तौलिया और साड़ी उठाई, लेकिन मन में एक अजीब सी हलचल थी।
बाथरूम का दरवाजा हल्का सा खुला था, और जैसे ही राज ने सामान रखने के लिए झुका, उसकी नजर अंदर पड़ी। मीना, पूरी नंगी, पानी की बूंदों से भीगी हुई, अपनी चमकती त्वचा के साथ खड़ी थी। उसकी चूत, घनी बालों से ढकी, और उसके भरे हुए दूध (स्तन) पानी से चमक रहे थे। राज की साँसें रुक गईं, उसका लंड पैंट में तन गया। मीना ने अचानक उसकी तरफ देखा और मुस्कुराई, 'क्या देख रहा है, मादरचोद? जल्दी से साड़ी दे और निकल यहाँ से।'
राज ने हड़बड़ाते हुए सामान दिया, लेकिन उसकी आँखें बार-बार मीना के जिस्म पर जा रही थीं। मीना ने तौलिया लपेटा और कहा, 'पैंटी, साया और ब्लाउज भी ला दे, बेटा। चूत को ढकना पड़ता है, नहीं तो ये मर्दों की नजरें खा जाएँगी।' उसकी बातों में एक तीखापन था, लेकिन राज को उसकी बेबाकी और भी उत्तेजित कर रही थी। उसने जल्दी से सब ला दिया, पर मीना ने ब्रा पहनना भूल गया। ब्लाउज पहनते वक्त उसके निप्पल साफ दिख रहे थे, और गीले कपड़े से उसका जिस्म और भी उभर रहा था।
तभी दरवाजे पर घंटी बजी। राज का दोस्त श्याम आया था। श्याम, एक 26 साल का लड़का, मीना को देखते ही ठिठक गया। मीना ने चाय बनाने के लिए रसोई में कदम रखा, और झुकते वक्त उसकी चूत और गांड की हल्की झलक श्याम को दिख गई। श्याम की आँखें फटी की फटी रह गईं, उसका लंड भी तन गया। राज ने गौर किया और गुस्से में कहा, 'क्या देख रहा है, मादरचोद? अपनी नजरें नीची कर।'
श्याम ने हँसते हुए कहा, 'अरे भाई, तेरी माँ है ही इतनी मस्त, क्या करूँ? ये दूध, ये चूत, पहली बार देखा है मैंने। तू तो रोज देखता होगा, साले।' मीना ने रसोई से सुन लिया और चाय के साथ बाहर आई, 'श्याम, तू बड़ा बेशर्म है। मेरे जिस्म को घूर रहा है, और ऊपर से मुँह भी चल रहा है। चल, चाय पी और निकल यहाँ से।'
श्याम ने चाय का कप लिया, लेकिन उसकी नजरें मीना के ब्लाउज से चिपकी थीं। गीले कपड़ों से उसके निप्पल साफ दिख रहे थे। मीना ने उसकी नजर पकड़ ली और ताने मारते हुए कहा, 'क्या, तेरे घर में माँ नहीं है जो इतना घूर रहा है, हरामी? अगर इतनी ही गर्मी है, तो जा अपने लंड को ठंडा कर।'
श्याम चला गया, लेकिन राज का गुस्सा और उत्तेजना दोनों बढ़ गए थे। उसने मीना से कहा, 'माँ, तूने ब्रा भी नहीं पहनी, और वो साला श्याम तुझे घूर रहा था।' मीना ने बेपरवाही से जवाब दिया, 'तो क्या, बेटा? मेरा जिस्म, मेरी मर्जी। अगर वो घूर रहा था, तो उसकी आँखें फोड़ दे। मैं तो वैसे भी किसी से डरती नहीं।'
रात गहराने लगी, और राज के मन में एक अजीब सी आग जल रही थी। मीना अपने कमरे में थी, और राज दरवाजे के पास खड़ा उसकी साँसों की आवाज सुन रहा था। अचानक मीना ने दरवाजा खोला, सिर्फ एक पतली सी नाइटी में, और कहा, 'क्या चाहता है, राज? तू भी वही सोच रहा है जो श्याम सोच रहा था, ना? आ, अंदर आ, आज तुझे दिखाती हूँ कि मैं कितनी गर्म हूँ।'
उसकी बातों ने राज को पागल कर दिया। उसका लंड अब पूरी तरह से हार्ड हो गया था। मीना ने उसे पास खींचा, उसकी पैंट के ऊपर से उसके लंड को छुआ और कहा, 'देख, कितना तना हुआ है। आज मैं तुझे सिखाऊँगी कि असली मस्ती क्या होती है।' वो दोनों बिस्तर की तरफ बढ़े, जहाँ हवा में गर्मी और उत्तेजना की लहरें तैर रही थीं।
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