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माँ की हवस की आग

माँ की हवस की आग

अध्याय 1: पहली नजर का जादू

सुबह की पहली किरणें जब खिड़की से छनकर कमरे में आईं, तो रानी की आँखें खुलीं। रानी, 42 साल की एक हॉट और कामुक औरत, जिसकी फिगर 38-30-40 थी, अपने बेटे दीपक के साथ एक छोटे से घर में रहती थी। उसकी गोरी चमड़ी, भरे हुए स्तन और गोल-मटोल गाण्ड किसी को भी दीवाना बना सकती थी। लेकिन आज उसकी नजरें कुछ और ही खोज रही थीं। दीपक, 22 साल का जवान लड़का, जिसके बारे में रानी ने सुना था कि उसका लंड दुनिया में सबसे बड़ा है।

रानी रसोई में खड़ी चाय बना रही थी, जब दीपक बाथरूम से निकला। उसने सिर्फ एक तौलिया लपेटा हुआ था, जो मुश्किल से उसकी कमर को ढक रहा था। रानी की नजरें अचानक तौलिये के नीचे की उभरी हुई चीज पर गईं। 'हे भगवान!' उसने मन ही मन सोचा, 'ये क्या है? इतना बड़ा लंड मैंने पहले कभी नहीं देखा!' उसकी आँखें चमक उठीं, और उसकी चूत में एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी।

'दीपक, बेटा, चाय पिएगा?' रानी ने मुस्कुराते हुए पूछा, अपनी आवाज में एक कामुक लहजा डालते हुए।

'हाँ माँ, क्यों नहीं,' दीपक ने जवाब दिया, उसकी नजरें रानी की टाइट साड़ी पर टिकी थीं, जो उसके भरे हुए स्तनों को मुश्किल से संभाल रही थी।

'तू कितना बड़ा हो गया है, बेटा,' रानी ने कहा, उसकी आँखें दीपक के तौलिये की ओर इशारा करती हुईं। 'कुछ चीजें तो बहुत बड़ी हो गई हैं!' उसने हँसते हुए कहा, अपनी जीभ होंठों पर फेरते हुए।

दीपक थोड़ा शरमा गया, लेकिन उसने भी हँसते हुए कहा, 'माँ, तुम भी तो कम नहीं हो। ये साड़ी में तुम्हारी गाण्ड तो किसी को भी पागल कर दे!'

रानी के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आई। 'अच्छा? तो तू अपनी माँ की गाण्ड देखता है? शैतान कहीं का!' उसने कहा और जानबूझकर अपनी साड़ी को थोड़ा ऊपर खींचा, जिससे उसकी मोटी जांघें दिखने लगीं।

दीपक की साँसें तेज हो गईं। उसका लंड तौलिये के नीचे सख्त होने लगा। रानी ने ये देख लिया और मन ही मन सोचा, 'बस, अब इसे और तड़पाना है। मैं इसे अपनी चूत में लेने के लिए कुछ भी करूँगी।'

उसने प्लान बनाया कि वो घर के कामों में दीपक को अपने करीब लाएगी। 'दीपक, जरा मेरी मदद कर ना, ये अलमारी साफ करनी है,' उसने कहा और जानबूझकर ऊँचे शेल्फ पर चढ़ गई, जिससे उसकी साड़ी ऊपर उठ गई और उसकी गोल गाण्ड दीपक के सामने आ गई।

'माँ, सावधान रहो,' दीपक ने कहा, लेकिन उसकी आँखें रानी की गाण्ड से हट नहीं रही थीं। उसका लंड अब पूरी तरह से सख्त हो चुका था, और तौलिया उसे छुपा नहीं पा रहा था।

रानी नीचे उतरी और दीपक के करीब आई। उसकी साँसें गर्म थीं, और उसने दीपक के कंधे पर हाथ रखा। 'तू कितना मजबूत है, बेटा। मुझे तो तेरी ताकत चाहिए,' उसने धीमी आवाज में कहा, उसकी आँखें दीपक के तौलिये की ओर देख रही थीं।

दीपक अब खुद को रोक नहीं पा रहा था। उसने रानी को अपनी ओर खींचा, और उनकी साँसें एक-दूसरे से टकराने लगीं। 'माँ, तुम मुझे पागल कर रही हो,' उसने कहा, उसकी आवाज में हवस भरी थी।

रानी ने उसकी आँखों में देखा और कहा, 'तो पागल हो जा, बेटा। आज अपनी माँ की चूत को फाड़ दे!' उसने तौलिया खींच दिया, और दीपक का विशाल लंड सामने आ गया। रानी की आँखें चमक उठीं। वो घुटनों पर बैठ गई, उसकी जीभ दीपक के लंड को छूने के लिए बेताब थी।

(अगले अध्याय में जारी...)

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