अध्याय 1: धोखे की रात
दीपा की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वो किसी गहरे राज़ को छुपा रही हो। रात के ग्यारह बजे, जब शहर सो रहा था, वो निशांत के फ्लैट के दरवाजे पर खड़ी थी। उसकी साँसें तेज़ थीं, और दिल में एक तूफान सा उठ रहा था। उसने पुष्कर को धोखा दिया था, अपने बॉयफ्रेंड को, जिसके साथ वो पिछले तीन साल से थी। लेकिन निशांत की वो गहरी नजरें, वो कातिलाना मुस्कान—उसने दीपा को पागल कर दिया था।
'क्या सोच रही हो, दीपा? अंदर आओ ना, या फिर पुष्कर को फोन करूँ कि उसकी गर्लफ्रेंड मेरे दरवाजे पर खड़ी है?' निशांत ने दरवाजा खोलते हुए तंज कसा, उसकी आवाज़ में एक शरारत थी।
'चुप कर, निशांत। तू जानता है मैं यहाँ क्यों आई हूँ। पुष्कर एक बोरिंग इंसान है, और मैं बोरियत से तंग आ चुकी हूँ। मुझे कुछ नया चाहिए, कुछ खतरनाक,' दीपा ने कहा, उसकी आवाज़ में गुस्सा और चाहत दोनों थे। वो अंदर आई, अपनी हाई हील्स की आवाज़ गूंज रही थी।
'खतरनाक, हाँ? तो फिर तैयार हो जा, क्योंकि मैं कोई बच्चा नहीं हूँ जो सिर्फ़ बातें करूँ। मैं वो करूँगा जो तूने सपने में भी नहीं सोचा होगा,' निशांत ने कहा, उसकी आँखों में एक जंगलीपन था। उसने दीपा का हाथ पकड़ा और उसे दीवार की ओर धकेल दिया।
'देख, मैं कोई कमजोर लड़की नहीं हूँ। अगर तूने कुछ गलत किया, तो मैं तुझे ऐसा सबक सिखाऊँगी कि तू भूल नहीं पाएगा,' दीपा ने चेतावनी दी, लेकिन उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं। निशांत की गर्मी को वो महसूस कर रही थी।
'अरे, तू तो शेरनी है। लेकिन शेरनी को भी तोड़ना मुझे आता है,' निशांत ने हँसते हुए कहा और उसकी गर्दन पर एक गहरा चुम्बन दिया। दीपा की साँसें रुक सी गईं। 'ये तो बस शुरुआत है, रानी। आज रात तू मेरी हो, और मैं तुझे वो मज़ा दूँगा जो पुष्कर सपने में भी नहीं दे सकता।'
'बकवास मत कर, निशांत। दिखा तुझे क्या करना आता है, वरना मैं अभी चली जाऊँगी,' दीपा ने चुनौती दी, उसकी आँखों में आग थी।
निशांत ने उसे अपनी बाहों में खींच लिया, उसकी कमर को कसकर पकड़ते हुए। 'तू कहीं नहीं जाएगी, दीपा। आज रात तू मेरे बिस्तर पर होगी, और मैं तुझे वो सब सिखाऊँगा जो तूने पहले कभी नहीं सीखा।' उसने दीपा की ड्रेस के स्ट्रैप को नीचे खींचा, और उसकी त्वचा को छूते हुए कहा, 'तू कितनी गर्म है, साली। मैं तुझे चोदने के लिए मर रहा हूँ।'
दीपा ने उसकी आँखों में देखा, एक मुस्कान के साथ कहा, 'तो रुक क्यों रहा है, हरामी? दिखा तेरा लंड कितना ताकतवर है। मैं भी देखूँ कि तू कितना मर्द है।' उसकी बातों में एक जहर था, लेकिन वो चाहत से भरी थी।
निशांत ने उसे बिस्तर पर धकेल दिया, उसकी आँखों में एक पागलपन था। वो दोनों एक-दूसरे को नोंचने लगे, जैसे दो जंगली जानवर। दीपा की साँसें तेज़ हो रही थीं, और निशांत का हर स्पर्श उसे और गर्म कर रहा था। वो जानती थी कि ये रात उसकी ज़िंदगी बदल देगी।
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