अध्याय 1: पहली मुलाकात की चिंगारी
रात का समय था, दिल्ली की गलियों में हल्की ठंडी हवा चल रही थी। अनन्या, एक तेज-तर्रार पत्रकार, अपने स्कूटर पर सवार होकर एक इन्टरव्यू से लौट रही थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, शायद काम की थकान या फिर कुछ और। तभी उसकी नजर सड़क किनारे खड़े एक शख्स पर पड़ी। वो था राघव, एक मशहूर फोटोग्राफर, जिसकी तस्वीरें हर बार लोगों के दिलों को छू लेती थीं। उसकी मोटरसाइकिल खराब हो गई थी, और वो मदद की तलाश में था।
अनन्या ने स्कूटर रोका और उसकी तरफ देखते हुए कहा, 'अरे, राघव मल्होत्रा, सड़क पर अकेले? क्या हुआ, कैमरा तो नहीं टूट गया ना?' उसकी आवाज में तंज था, लेकिन आँखों में शरारत।
राघव ने हंसते हुए जवाब दिया, 'अरे अनन्या शर्मा, तुम तो हर जगह खबर ढूंढ लेती हो। कैमरा तो ठीक है, पर ये मोटरसाइकिल मेरा साथ छोड़ गई। मदद करोगी, या सिर्फ ताने मारोगी?'
अनन्या ने एक भौंह उठाई और कहा, 'मदद तो करूंगी, लेकिन शर्त है। मुझे तुम्हारी अगली फोटो स्टोरी की एक्सक्लूसिव खबर चाहिए। सौदा पक्का?'
राघव ने मुस्कुराते हुए कहा, 'तुम्हारी हर शर्त मंजूर, बस मुझे यहाँ से निकालो। वैसे, तुम्हारी स्कूटर पर बैठना तो किसी सपने जैसा होगा।' उसकी आवाज में एक हल्की सी छेड़खानी थी।
अनन्या ने हंसते हुए कहा, 'सपने देखना बंद करो, राघव। बैठो, लेकिन हाथ-पैर संभाल के रखना। मैं कोई ड्राइवर नहीं हूँ।' वो स्कूटर पर बैठा, और उसकी गर्म सांसें अनन्या की गर्दन को छूने लगीं। रास्ते भर दोनों की बातों में एक अजीब सा तनाव था, जैसे कोई अनकही आग सुलग रही हो।
राघव के घर पहुँचते ही अनन्या ने स्कूटर रोका। राघव ने उतरते हुए कहा, 'अंदर आओ ना, कॉफी तो पी लो। इतनी रात को अकेले जाना ठीक नहीं।'
अनन्या ने एक पल सोचा, फिर मुस्कुराते हुए कहा, 'कॉफी? या कुछ और का बहाना है, मिस्टर फोटोग्राफर?'
राघव ने उसकी आँखों में देखते हुए जवाब दिया, 'जो तुम समझना चाहो, अनन्या। मैं तो बस इतना जानता हूँ कि तुम्हारी आँखों में वो चिंगारी है, जो मुझे जला सकती है।'
अनन्या का दिल तेजी से धड़कने लगा। वो अंदर गई, और दरवाजा बंद होते ही राघव ने उसका हाथ पकड़ लिया। उसकी गर्मी अनन्या को महसूस हो रही थी। उसने राघव की ओर देखा और कहा, 'ये खेल खतरनाक है, राघव। मैं कोई आसान शिकार नहीं हूँ।'
राघव ने हंसते हुए कहा, 'मुझे शिकार नहीं, एक बराबर की साथी चाहिए। तो, तैयार हो?'
अनन्या ने उसकी कॉलर पकड़ते हुए उसे अपनी ओर खींचा और कहा, 'देखते हैं, तुम कितने तैयार हो।' उनकी सांसें एक-दूसरे से टकराने लगीं, और कमरे में एक तूफान सा माहौल बनने लगा।
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