अध्याय 1: पहला स्पर्श
सुबह की पहली किरणें जब घर की खिड़की से छनकर आईं, तो रिया अपनी बरामदे में खड़ी थी, उसकी गहरी सांवली त्वचा सूरज की रोशनी में चमक रही थी। उसकी लंबी चोटी, जो एकदम परफेक्ट बंधी हुई थी, और नाक में नई नथनी उसकी खूबसूरती को चार चांद लगा रही थी। उसने हल्का गुलाबी सलवार कमीज पहना था, जो उसकी कर्व्स को हल्के से उभार रहा था। तभी उसका छोटा भाई, अर्जुन, कमरे में आया, हाथ में एक छोटा सा डिब्बा लिए।
'दीदी, आज मेरा जन्मदिन है, मुझे एक खास तोहफा चाहिए,' अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा, उसकी आंखों में एक शरारत भरी चमक थी।
'क्या चाहिए, बता ना, हर साल की तरह ड्रामा मत कर,' रिया ने हंसते हुए कहा, उसकी आवाज में एक तीखा व्यंग्य था।
'तोहफा तो तुम ही हो, दीदी। बस, ये नथनी ठीक से पहनने में मदद कर दो,' अर्जुन ने डिब्बा खोलते हुए कहा। रिया ने आंखें नचाईं, लेकिन फिर भी हामी भर दी। उसने अपनी नाक के पास नथनी लगाई, और अर्जुन ने धीरे से उसकी मदद की। उसका स्पर्श हल्का था, लेकिन रिया के शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई।
'वाह, दीदी, ये नथनी पहनने के बाद तुम्हारी खूबसूरती... उफ्फ, और ये होंठ... इतने रसीले, शरारती, कामुक... मैं तो बस देखता ही रह जाऊं,' अर्जुन ने तारीफ करते हुए कहा, उसकी आवाज में एक गहरा आकर्षण था।
'बकवास बंद कर, अर्जुन! मैं तेरी दीदी हूं, ये सब क्या बोल रहा है?' रिया ने तीखे लहजे में कहा, लेकिन उसकी गालों पर लाली छा गई।
अर्जुन ने बिना कुछ कहे, अचानक रिया को अपनी ओर खींच लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। रिया एकदम चौंक गई, ये उसका पहला चुंबन था। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, लेकिन अर्जुन रुका नहीं। उसने रिया के होंठों को चूमा, चाटा, और साथ ही अपने हाथों से उसकी कमीज के ऊपर से उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया।
'अर्जुन, ये क्या कर रहा है? रुक जा!' रिया ने सांस लेते हुए कहा, लेकिन उसकी आवाज में एक अजीब सी कमजोरी थी।
'दीदी, मैं तुमसे प्यार करता हूं। तुम्हारी हर चीज मुझे पागल कर देती है,' अर्जुन ने कहा, उसकी उंगलियां रिया की कमीज के अंदर बिकिनी के ऊपर से उसके निप्पलों को सहला रही थीं। रिया के गाल लाल हो गए, उसकी सांसें तेज हो गईं, लेकिन वो खुद को रोक नहीं पा रही थी।
'तू पागल है, अर्जुन। मैं तेरी दीदी हूं,' रिया ने फिर कहा, लेकिन उसकी आवाज में अब गुस्सा कम और शर्मिंदगी ज्यादा थी।
अर्जुन ने हंसते हुए कहा, 'दीदी, आज मैं तुम्हें लेकर भाग रहा हूं। तुम इतनी खूबसूरत लग रही हो, मैं तुम्हें अपनी दुल्हन बनाना चाहता हूं।' उसने रिया को अपनी गोद में उठा लिया और घर के पास बहने वाली नदी की ओर दौड़ पड़ा।
'अर्जुन, ये क्या पागलपन है? कहां ले जा रहा है मुझे?' रिया ने हंसते हुए पूछा, उसकी चोटी हवा में लहरा रही थी।
'नदी किनारे, दीदी। वहां मैं तुम्हारी इस खूबसूरती को रात भर निहारना चाहता हूं। तुम्हारे इन गोल, रसीले स्तनों को चूमना चाहता हूं, इन निप्पलों को चूसना चाहता हूं,' अर्जुन ने कहा, उसकी आवाज में एक गहरी कामुकता थी।
रिया के गाल फिर से लाल हो गए, लेकिन वो कुछ कह न सकी। नदी किनारे पहुंचते ही अर्जुन ने रिया को नीचे उतारा। उसने धीरे से रिया की कमीज ऊपर की, उसके हाथों को ऊंचा करके बांध दिया, और उसका चेहरा कमीज से ढक दिया। फिर उसने रिया की सलवार और बिकिनी उतार दी, अब वो सिर्फ अंडरवियर में थी। उसकी सांवली त्वचा चांदनी में चमक रही थी।
'अर्जुन, ये सब गलत है,' रिया ने शर्माते हुए कहा, लेकिन उसकी सांसें तेज थीं, उसका शरीर गर्म हो रहा था।
अर्जुन ने बिना जवाब दिए, रिया के एक स्तन को अपने मुंह में लिया और उसके निप्पल को जीभ से सहलाने लगा। रिया की सिसकारी निकल गई, उसका शरीर कांपने लगा। अर्जुन ने दूसरे स्तन को भी वैसे ही चूमा, चूसा, और उसे बार-बार कगार पर लाकर रोक दिया। रिया की सांसें पैंटिंग की तरह तेज हो गईं, उसका शरीर पसीने से तर हो गया, वो हॉर्नी हो रही थी, उसकी पुसी वेट हो रही थी, ड्रिपिंग हो रही थी।
'अर्जुन, प्लीज... अब रुक मत,' रिया ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए कहा, उसकी आवाज में एक आग थी।
'दीदी, अभी तो रात शुरू हुई है,' अर्जुन ने शरारती मुस्कान के साथ कहा, उसका कॉक हार्ड हो रहा था, और वो जानता था कि रिया अब पूरी तरह से उसकी है।
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