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इच्छा की आग

इच्छा की आग

**अध्याय 1: धोखे की शुरुआत**

दीपा की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वो किसी गहरे रहस्य को छुपा रही हो। वो निशांत के फ्लैट में खड़ी थी, उसकी साँसें तेज़ थीं और दिल धड़क रहा था। निशांत, एक लंबा, मज़बूत शख्स, अपनी काली शर्ट के बटन खोलते हुए उसकी ओर देख रहा था। उसकी मुस्कान में एक खतरनाक आकर्षण था, जो दीपा को अपनी ओर खींच रहा था।

'तो, दीपा, तूने पुष्कर को छोड़ दिया मेरे लिए? साला, वो तो तेरा प्यारा बॉयफ्रेंड था ना?' निशांत ने ताने मारते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक कटाक्ष था।

दीपा ने अपनी आँखें सिकोड़ीं और जवाब दिया, 'हाँ, निशांत। वो चूतिया कुछ कर ही नहीं सकता था। मुझे चाहिए एक मर्द, जो मुझे वो दे सके जो मैं चाहती हूँ। तू समझता है ना?' उसकी आवाज़ में एक चुनौती थी, वो किसी से डरने वाली नहीं थी।

निशांत हँसा, उसकी हँसी में एक जंगलीपन था। 'अच्छा, तो तू चाहती है कि मैं तुझे वो मज़ा दूँ जो वो हरामी नहीं दे पाया? चल, देखते हैं तू कितना संभाल सकती है।' वो करीब आया, उसकी साँसें दीपा के चेहरे पर महसूस हो रही थीं।

दीपा ने एक कदम पीछे नहीं हटाया। उसने निशांत की छाती पर हाथ रखा और कहा, 'मैं संभाल लूँगी, तू बस अपनी औकात दिखा। मैं कोई कमज़ोर लड़की नहीं हूँ, जो डर जाए।' उसकी आँखों में आग थी, वो तैयार थी हर हद पार करने के लिए।

निशांत ने उसकी कमर पकड़ ली और उसे दीवार की ओर धकेल दिया। 'अच्छा, तो तू चाहती है कि मैं तुझे रगड़ दूँ? देख, मैं कोई नरमी नहीं बरतने वाला। तूने मुझे चुना है, तो अब तुझे मेरी हर बात माननी पड़ेगी।' उसकी आवाज़ में एक सख्ती थी, लेकिन दीपा ने उसकी बात को हल्के में लिया।

'मानूँगी, लेकिन तू पहले साबित कर कि तू मर्द है। मुझे तोड़ दे, अगर हिम्मत है तेरे में,' दीपा ने तंज कसा, उसकी साँसें गर्म थीं और वो उत्तेजना से काँप रही थी।

निशांत ने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा और उसे फर्श पर गिरा दिया। 'देख, दीपा, मैं तुझे ऐसा चोदूँगा कि तू पुष्कर का नाम भी भूल जाएगी। तू बस मेरी बनकर रह जाएगी।' उसने दीपा के होंठों पर अपने होंठ रख दिए, एक गहरा, जंगली चुम्बन जो दोनों को उत्तेजना की कगार पर ले गया।

दीपा ने उसके बालों को पकड़ लिया और कहा, 'बातें कम कर, निशांत। मुझे तेरे लंड की ताकत चाहिए, दिखा कि तू कितना हार्ड है।' उसकी बातों में एक आग थी, वो किसी भी हद तक जाने को तैयार थी।

निशांत ने उसकी ब्लाउज़ को फाड़ दिया, और दीपा की साँसें तेज़ हो गईं। वो पसीने से तर थी, उसकी चूत गीली हो रही थी, और वो बस निशांत को अपने अंदर महसूस करना चाहती थी। 'चल, हरामी, मुझे चोद दे। मैं तेरे लिए तैयार हूँ,' उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक बेताबी थी।

निशांत ने अपनी पैंट खोल दी, उसका लंड सख्त और तैयार था। वो दीपा को बेड की ओर ले गया, और दोनों की साँसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं। वो पल करीब था जब दोनों एक-दूसरे में खो जाने वाले थे, एक ऐसी आग में जो बुझने का नाम नहीं लेती।

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