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माँ की हवस की आग

माँ की हवस की आग

अध्याय 1: पहली नजर की चिंगारी

सुबह की पहली किरणें जब खिड़की से छनकर कमरे में आईं, तो राधिका की आँखें खुलीं। 38 साल की राधिका, एक हिंदुस्तानी माँ, अपनी 36-28-38 की कातिलाना फिगर से किसी को भी दीवाना बना सकती थी। उसकी गोरी चमड़ी, भरे हुए होंठ, और गहरी काली आँखें किसी का भी दिल चुरा लेती थीं। लेकिन आज उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी। उसका बेटा दीपक, 20 साल का जवान लड़का, घर में ही था, और राधिका के मन में कुछ गलत ख्याल आने लगे थे।

रसोई में नाश्ता बनाते वक्त उसने सोचा, 'दीपक तो बड़ा हो गया है, लेकिन क्या वो वाकई में...?' उसकी सोच अधूरी रह गई जब अचानक बाथरूम का दरवाजा खुला और दीपक बाहर निकला, सिर्फ एक तौलिया लपेटे हुए। राधिका की नजरें अनजाने में नीचे गईं, और उसने देखा—वो चीज जो उसने पहले कभी नहीं देखी थी। दीपक का लंड, इतना बड़ा और मोटा, कि तौलिए के नीचे भी साफ नजर आ रहा था। राधिका की साँसें रुक गईं। 'हे भगवान, ये तो दुनिया का सबसे बड़ा लंड होगा!' उसने मन ही मन सोचा।

दीपक ने माँ को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, 'क्या हुआ माँ, ऐसे क्यों देख रही हो? कुछ जल गया क्या?'

राधिका ने हड़बड़ाते हुए जवाब दिया, 'न-नहीं बेटा, बस... तू बड़ा हो गया है ना, सोच रही थी।' उसकी आवाज में एक अजीब सी कशिश थी।

दीपक हँसा, 'हाँ माँ, बड़ा तो बहुत हो गया हूँ।' उसकी आँखों में एक शरारत थी, और राधिका को लगा जैसे वो जानबूझकर तौलिए को ढीला कर रहा है।

उस रात राधिका बिस्तर पर लेटी हुई थी, लेकिन नींद कोसों दूर थी। उसकी चूत में एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी। 'मैं ये क्या सोच रही हूँ? वो मेरा बेटा है... लेकिन वो लंड... हाय राम, मैं पागल हो जाऊँगी!' उसने फैसला किया कि वो दीपक को रिझाएगी, अपनी जवानी का जादू दिखाएगी।

अगले दिन से उसने प्लान बनाया। सबसे पहले तो वो घर में टाइट साड़ी पहनने लगी, जिसमें उसकी गोल गांड और भरे हुए सीने साफ नजर आएँ। वो जानबूझकर दीपक के सामने झुकती, ताकि उसकी गहरी क्लीवेज दिखे। 'दीपक, जरा ये सामान ऊपर रख दे ना,' कहते हुए वो अपनी साड़ी का पल्लू गिरा देती। दीपक की नजरें उसकी माँ के जिस्म पर टिक जातीं, और राधिका को पता था कि वो कामयाब हो रही है।

एक दिन, जब दीपक सोफे पर बैठा टीवी देख रहा था, राधिका पास आई और बोली, 'बेटा, मेरी कमर में दर्द है, जरा दबा दे ना।' उसने अपनी साड़ी थोड़ी ऊँची की ताकि उसकी चिकनी टाँगें दिखें। दीपक ने हँसते हुए कहा, 'माँ, तुम तो दिन-ब-दिन जवान होती जा रही हो।'

राधिका ने शरारती अंदाज में जवाब दिया, 'हाँ बेटा, लेकिन तू तो मुझसे भी ज्यादा गर्म है।' उसकी बात में डबल मीनिंग था, और दीपक की आँखें चमक उठीं।

राधिका ने देखा कि दीपक का लंड तौलिए के नीचे से सख्त हो रहा था। वो पास आई, उसकी जाँघों पर हाथ रखा और बोली, 'बेटा, तू कितना बड़ा हो गया है... हर तरह से।' दीपक की साँसें तेज हो गईं। वो बोला, 'माँ, ये गलत है... लेकिन...'

राधिका ने उसकी बात काटते हुए कहा, 'गलत-सही कुछ नहीं, बस जो मन करे वो कर।' उसने दीपक के तौलिए को खींच दिया, और उसका विशाल लंड सामने आ गया, पूरी तरह से हार्ड। राधिका की चूत गीली हो गई, उसकी साँसें तेज थीं। वो नीचे झुकी, उसकी आँखों में हवस थी, और वो तैयार थी दीपक को वो सुख देने के लिए जो उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।

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