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माँ की हवस की आग

माँ की हवस की आग

**पहला अध्याय: पहली नजर की चिंगारी**

सविता, एक 42 साल की हॉट और सेक्सी माँ, अपनी 38-28-40 की कातिलाना फिगर के साथ किसी की भी सांसें थाम लेती थी। उसकी गहरी भूरी आँखों में एक अजीब सी हवस की चमक थी, जो सालों से दबी हुई थी। उसका बेटा दीपक, 22 साल का जवान लड़का, घर में ही रहता था। सविता ने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन उसकी नजर अपने ही बेटे की तरफ इस तरह खिंचेगी। लेकिन उस दिन, जब उसने गलती से बाथरूम का दरवाजा खुला देखा, उसकी दुनिया ही बदल गई।

दीपक नहा रहा था, और सविता की नजर सीधे उसके विशाल, मोटे लंड पर पड़ी। उसने पहले कभी इतना बड़ा और मोटा लंड नहीं देखा था—लगभग 10 इंच का, जो किसी हथियार से कम नहीं लग रहा था। उसकी सांसें तेज हो गईं, और दिल में एक अजीब सी गर्मी दौड़ने लगी। 'ये क्या है? मेरा बेटा... इतना बड़ा लंड?' उसने सोचा, अपनी चूत में एक हल्की सी गुदगुदी महसूस करते हुए।

उस रात सविता सो नहीं पाई। उसकी आँखों के सामने बार-बार दीपक का वो विशाल लंड घूम रहा था। उसने फैसला किया कि उसे दीपक को अपनी तरफ आकर्षित करना होगा। 'मैं उसे अपनी जवानी का स्वाद चखाऊँगी,' उसने मन में ठान लिया। उसने प्लान बनाया—वो घर में टाइट साड़ी पहनेगी, जिसमें उसकी भारी गाण्ड और मोटे मम्मे साफ दिखें। वो जानबूझकर दीपक के सामने झुकेगी, ताकि उसे अपनी गहरी क्लीवेज दिखे। वो उससे बातें करेगी, हँसेगी, और हर मौके पर उसे छूने की कोशिश करेगी।

अगले दिन सुबह, सविता ने एक पारदर्शी साड़ी पहनी, जिसमें उसकी काली ब्रा साफ दिख रही थी। वो रसोई में खाना बना रही थी, जब दीपक वहाँ आया। 'दीपक, बेटा, जरा ये बर्तन ऊपर रख दे,' उसने कहा, जानबूझकर नीचे झुकते हुए ताकि उसकी साड़ी का पल्लू गिर जाए और उसके मम्मे दीपक को साफ दिखें।

दीपक ने एक नजर डाली और हड़बड़ा गया। 'माँ, ये क्या... मैं मतलब... ठीक है,' वो हकलाते हुए बोला, लेकिन उसकी नजर बार-बार सविता की तरफ जा रही थी। सविता मुस्कुराई और बोली, 'क्या हुआ बेटा? तू तो शरमा रहा है। मैं तेरी माँ हूँ, मुझसे क्या शर्माना?' उसकी आवाज में एक छुपी हुई कामुकता थी।

'माँ, आप... आप बहुत खूबसूरत लग रही हो आज,' दीपक ने हिम्मत करके कहा। सविता हँसी और पास आते हुए बोली, 'अच्छा? तो तू अपनी माँ को तारीफ भी कर सकता है? और क्या-क्या पसंद है तुझे मुझमें?' उसने अपनी साड़ी को हल्का सा ऊपर किया, ताकि उसकी मोटी जांघें दिखें।

दीपक की सांसें तेज हो गईं। 'माँ, ये गलत है... लेकिन... मैं खुद को रोक नहीं पा रहा,' उसने कहा, उसकी आँखों में हवस साफ दिख रही थी। सविता ने उसका हाथ पकड़ा और अपनी कमर पर रख दिया। 'गलत-सही कुछ नहीं होता, बेटा। बस जो अच्छा लगे, वो कर ले,' उसने फुसफुसाते हुए कहा।

उसकी गर्म सांसें दीपक के चेहरे पर लग रही थीं। वो अब और नहीं रुक सका। उसने सविता को अपनी तरफ खींचा, और दोनों की नजरें मिलीं। सविता की चूत में गीलापन बढ़ रहा था, और वो जानती थी कि अब कुछ ही पलों में वो अपने बेटे के उस विशाल लंड को महसूस करेगी। दीपक का लंड अब पूरी तरह से हार्ड हो चुका था, और सविता की आँखों में एक जंगली भूख थी।

'माँ, मैं तुम्हें चाहता हूँ,' दीपक ने कहा, उसकी आवाज में एक अजीब सी तड़प थी। सविता ने मुस्कुराते हुए कहा, 'तो देर किस बात की, बेटा? आ जा, अपनी माँ को दिखा कि तेरा लंड कितना ताकतवर है।' वो उसे बेडरूम की तरफ ले गई, जहाँ दोनों की हवस की आग अब भड़कने वाली थी।

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