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इच्छा की आग

इच्छा की आग

अध्याय 1: धोखे की शुरुआत

दीपा की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जब उसने निशांत को अपने अपार्टमेंट में बुलाया। वो जानती थी कि पुष्कर, उसका बॉयफ्रेंड, शहर से बाहर है, और ये मौका उसे अपनी छुपी हुई इच्छाओं को आज़ाद करने का दे रहा था। दीपा एक मज़बूत औरत थी, जो अपनी चाहतों को किसी के सामने झुकने नहीं देती थी। उसकी आवाज़ में एक तीखापन था जब उसने निशांत को अंदर बुलाते हुए कहा, 'आजा, निशांत, आज तुझे दिखाऊँगी कि असली मज़ा क्या होता है। पुष्कर तो बस नाम का मर्द है, साला कुछ कर ही नहीं सकता।'

निशांत, एक लंबा-चौड़ा मर्द, जिसकी मुस्कान में एक खतरनाक आकर्षण था, दरवाज़ा बंद करते हुए हँसा, 'दीपा, तू तो आग है। पुष्कर को पता चलेगा तो जलकर राख हो जाएगा, लेकिन मुझे क्या, मैं तो तेरे साथ जलने को तैयार हूँ।'

दीपा ने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका दिया, उसकी गहरी क्लीवेज निशांत की आँखों के सामने थी। उसने तीखे लहजे में कहा, 'देख, मैं कोई कमज़ोर औरत नहीं हूँ। मैं जो चाहती हूँ, वो लेती हूँ। तू मर्द है तो दिखा, वरना निकल जा यहाँ से।'

निशांत ने एक कदम आगे बढ़ाया, उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं। 'तू मुझे चैलेंज कर रही है, दीपा? ठीक है, आज तुझे दिखाता हूँ कि असली मर्द क्या होता है। तेरा ये गुस्सा, ये तेवर, मुझे और उकसा रहे हैं।'

दीपा ने उसे अपनी ओर खींचा, उसकी आँखों में वासना की आग साफ दिख रही थी। 'बातें कम, काम ज़्यादा, निशांत। मैं तेरे लंड को देखना चाहती हूँ, कितना hard है तू।' उसने अपनी उंगलियाँ निशांत की शर्ट पर चलाईं, और उसे खोलने लगी। निशांत की साँसें तेज़ हो गईं, उसका शरीर गर्मी से तप रहा था।

'दीपा, तू कितनी horny है, यार। तूने तो मुझे पागल कर दिया,' निशांत ने कहा, उसकी आवाज़ में एक कच्ची भूख थी। उसने दीपा की साड़ी को एक झटके में खींच दिया, और उसकी नंगी कमर को देखकर उसकी आँखें चमक उठीं। 'तेरी ये ass, कितनी मस्त है। मैं इसे चाटना चाहता हूँ।'

दीपा ने एक ठहाका लगाया, 'चाटना ही नहीं, तुझे सब कुछ करना पड़ेगा, निशांत। मैं तेरे सामने अपनी pussy खोलूँगी, लेकिन तुझे मुझे रुलाना होगा मज़े से।' वो उसे अपने बेडरूम की ओर ले गई, उसकी चाल में एक खतरनाक आत्मविश्वास था।

कमरे में पहुँचते ही निशांत ने दीपा को दीवार से सटा दिया, उसकी साँसें गर्म थीं, और वो sweating कर रहा था। 'तू तैयार है, दीपा? मैं तुझे blowjob से लेकर सब कुछ दूँगा, लेकिन तू चीखेगी मेरे नाम से।' दीपा ने उसकी आँखों में देखा, उसकी साँसें panting में बदल गई थीं। 'निशांत, मैं wet हूँ, dripping हूँ तेरे लिए। आ, मुझे चोद दे, लेकिन याद रख, मैं तेरे ऊपर हावी होऊँगी।'

उसके ये शब्द निशांत के लिए आग में घी डालने जैसे थे। वो दोनों एक-दूसरे की ओर बढ़े, उनके शरीरों में वासना की आग भड़क रही थी। अब बस एक ही चीज़ बाकी थी—वो विस्फोट, जो उनके बीच होने वाला था।

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